जाग देवता-जाग देवता (संस्मरणात्मक व्यंग्य)

जाग देवता-जाग देवता (संस्मरणात्मक व्यंग्य)
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क्राउन अर्थात मुकुटधारी राक्षस रूपी कोरोना वायरस के संक्रमण के भय से ग्रसित दुनिया के लोग लॉक डाउन के पिंजरे में अपने ही घरों में कैद और उस पर सितम यह कि अपने फ्रिज देवता की शीतलता का चले जाना तो वैसा ही था जैसे अनाड़ी फ़िल्म का वो गीत 'तेरा जाना दिल के अरमानों का लुट जाना।'बदन में झुरझुरी सी हुई और पैरों के नीचे से कालीन खिसकता सा लगा।
"हे भगवान अब क्या होगा!अब इस लॉक डाउन कहाँ कोई मैकेनिक मिलेगा!"
कर्कश आवाज़ में श्रीमतीजी के दोषारोपण शुरू हो चुके थे।"कितनी बार फ्रीजर का दरवाज़ा खुला छोड़ देते थे।मैं लगाती थी।वहीं खड़े-खड़े गट-गट बोतल से ठंडा पानी पिया और बिना पूरा गेट लगाए ही चलते बने।बिगड़ना तो तय था।सब तुम्हारी ही लापरवाही के नतीजे हैं।अब भुगतो।दूध नीचे शर्मा जी के यहाँ रखवाकर आओ नहीं तो शाम की चाय भी नसीब नहीं होगी।"
जब से जल देवता ने मिनरल रूप में अवतार लिया तो कनेक्शन ले लिया था।उसी से बोतल में भरा और जल देवता को फ्रिज देवता के फ्रीजर के हवाले करके निश्चिंत हो जाते थे।दोषारोपण से बड़ी ग्लानि हुई कि अभी तक हम सिर्फ मोबाइल देव की पूजा में ही मगन थे।उनके लिए तो नियमित रूप से डाटा का प्रबंध करते रहे।उनको सदैव चार्ज रखने के लिए पॉवर बैंक का भी सहयोग देना शुरू कर दिया। फ्रिज देव के प्रति तो वाकई लापरवाह हो गए थे।
"हे फ्रिज देव,पिछले दस वर्षों से आप किसी सिद्ध योगी की भांति कितने सरल,शांत,अविचल,निस्वार्थ भाव से खड़े-खड़े अपनी कृपा हम पर निर्विघ्न बरसाते रहे।शीतल चंदा की चाँदनी भी रात्रि में ही अनुभव कर सकते हैं परंतु आप तो कृतिम ही सही 24×7 शीतलता प्रदान करते रहे हो।"  
हमारे देशवासियों में ऐसी अवधारणा रही है कि 'घर का जोगी जोगड़ा और बाहर का जोगी सिद्ध' इसलिए हमने भी देसी जोगियों के मुकाबले आप जैसे दक्षिण कोरिया के जोगी को ही सिद्ध मानकर प्राथमिकता दी थी।श्वेत रंग ही शांति,शीतलता का प्रतीक माना जाता था इसलिए वर्षों तक हम श्वेत जोगियों पर ही विश्वास करते रहे।कालांतर में रंगीन जोगी भी आये पर उतने आकर्षक नहीं थे जितने आप।आप की उपस्थिति से एक स्टेटस सिंबल बन जाता है।
"अन्य लेखकों की भाँती मैं भी अपने सम्मानों व पुरस्कारों की पोस्ट फेसबुक पर साझा करता रहा हूँ और मैंने अपने गिने-चुने पुरस्कारों को भी आपके मस्तक पर ही मुकुट की तरह सुशोभित कर दिया था ताकि प्रत्येक घर आने-जाने वालों की दृष्टि आपके साथ-साथ उन पर भी पड़े और वह उनके बारे में पूँछें तब मैं गर्व के साथ बखान करूँ ये तब मिला था,वो तब मिला था और लोग मेरी और  इनकी भूरी-भूरी प्रशंसा करें और मेरे दिल को चैन मिले।" 'ओ मेरे दिल के चैन, चैन आये मेरे दिल को दुआ कीजिये।'ऐसी दुआएँ हम लेखक लोग अक्सर एक दूसरे के लिए करते रहते हैं मगर सत्यानाश हो इस कोरोना वायरस का,लॉक डाउन के कारण कोई साहित्यिक गोष्ठियां भी नहीं हो पा रहीं हैं।वरिष्ठ लेखक/लेखिकाएँ अध्यक्ष,विशेष अतिथि,विशिष्ट अतिथि व वक्ता बनने से भी वंचित हैं।न कोई दीप प्रज्वलन,न सरस्वती वंदना,न शाल,श्रीफल,न प्रशस्ति पत्र,न कोई दो शब्द बोलने का निमंत्रण।दीप, मोमबत्ती भी धूल खा रहे हैं।गले हार,फूल मालाओं के लिए तरस रहे हैं।सम्मान समारोह ही तो जीवन दायनी शक्ति प्रदान करते थे।यही सम्मान तो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ा देते थे।अगर ऐसा ही चलता रहा तो बगैर सम्मान के कैसे दिन रात कट पाएँगे!"जब लॉक डाउन खुल जायेगा तो सब एक दूसरे से पूँछेंगे "कैसे कटे दिन,कैसे कटी रातें?"
"पूछों न साथिया,दीवानों की बातें।"
"दुख में सुमिरन सब करें,सुख में करे न कोय वाला दोहा हम पर बिल्कुल सटीक बैठता है।गर्मियों के आगमन पर ए.सी.के फिल्टर्स भी हम साफ कर लेते थे।वाहन देव की पूजा-अर्चना में भी हम बहुत सजग,सतर्क रहते आये हैं।फ़िल्टर,आयल,ब्रेक शू,कूलेंट,क्लच प्लेट,वाइपर,सीट कवर्स,टायर्स,कार वाश का हमने बराबर ध्यान रखा।इन सब सुविधाओं मे हमने लक्ष्मी का कोई मोह नहीं रखा।"
बिजली उपकरणों में भी साधारण बल्ब,ट्यूब लाइट के बाद एल.सी.डी. आये फिर एल.ई.डी.का पदार्पण हुआ।इसमे भी हम हवा के साथ-साथ और घटा के संग-संग ही चले।
"टी.वी.,रिमोट,माइक्रो ओवन,गैस,प्रेस जैसे उपकरणों के मामले में हमारी तत्परता में कोई कमी-पेशी नहीं आयी।टी.वी.रिमोट पर एकाधिकार को लेकर तो कई बार हम पति-पत्नी में तीखी नोक-झोंक भी होती रही है।क्रोध के क्षणों में टी.वी.रिमोट का प्रयोग/दुरुपयोग अस्त्र-शस्त्र के रूप में भी होता आया है।उसकी स्वामिभक्ति की भी प्रशंसा तो करनी पड़ेगी।बिचारा काफी चलने के बाद दो नए सेल की ही अपेक्षा रखता है।आपके समक्ष कभी ऐसी कोई समस्या नहीं आयी।आपके भीतरी शांत स्वभाव से सदैव हमे प्रेरणा ही मिलती रही है।इंसान पहले अंदर से गरम होता है फिर वो गर्मी क्रोध के रूप में बाहर प्रस्फुटित होती है।किन्तु आप बाहर से गरम होकर भी अंदर से शीतल रहते हैं।यह तो आपकी विलक्षण प्रतिभा है जो अनुकरणीय है।वर्षों से आप हमें तरो-ताज़ा फल,सब्जियाँ, दूध,दही,आइस क्रीम खिलाते रहे हैं और हम इतने कृतघ्न हो गए कि अन्य उपकरणों की तुलना में आपको इतना महत्व नहीं दिया जो अपेक्षित था।श्रीमतीजी से भी आप शिकायत कर सकते हो कि 'दर्पण में देखा तूने जब-जब किया शृंगार,फूलों को देखा तूने जब-जब आयी बहार, एक बदनसीब हूँ मैं नहीं देखा एक बार।'
"हे फ्रिज देव इतनी गर्मी और लॉक डाउन में आप हमसे क्यों रूष्ट हो गए?कृपया हमारी नादानियों को नज़रंदाज़ करते हुए हमें माफ कर दीजिए और जाग जाइये।"
हमारी चिंता परेशानी को देखते हुए बेटी ने सुझाया कि मोबाइल एप्प की सहायता ली जाए।उसने एप्प से ही नंबर निकालकर एक मेकेनिक को बुला लिया।कोरोनासुर संग्राम में इस संकट की घड़ी में हर सहायता देव तुल्य ही लग रही थी।मोबाइल देव में ही एप्प देव विराजमान हैं जिससे मेकेनिक देव से संपर्क किया जा सकता है।लिहाजा थोड़ी देर बाद मैकेनिक देव अपनी भारी अटैची और एक झोला लिए हाज़िर थे।उनके सुर भी यह थे कि 'क्या-क्या न सहे हमने सितम आपकी खातिर।'
"मैंने आपकी खातिर पुलिस को एक सरकारी एलेक्ट्रिशियन बताते हुए एक ज़रूरी सरकारी काम से जाने का बहाना बनाया तब जाकर यहाँ पहुँचा हूँ।"उनके इस कथन पर कृतज्ञता प्रगट करते हुए हमने उनका हार्दिक आभार व्यक्त किया।
सर्वप्रथम उन्होंने फ्रिज पर रखे हुए मेरे समस्त पुरस्कारों को बेदर्दी से हटवा दिया,फिर उसका पिछवाड़ा अपनी ओर करते हुए व अटैची खोलकर अपने समस्त औजारों के साथ जमीन पर पसर गए।उन्होंने हमें आश्वस्त किया कि गैस तो मैं डाल दूँगा मगर कंप्रेशर उठना चाहिए नहीं तो खर्चा ज्यादा हो जाएगा।" ज्यादा खर्चे के भय से हम भी कंप्रेशर देव के जाग्रत होने की ही मंगलकामनाएं करने लगे थे।शालीमार फ़िल्म का वो गीत याद आया 'जाग देवता,जाग देवता,जनम दिया जिसको तूने क्यों डस लिया उसको नाग देवता।'
फ्रिज की ही भांति उन्होंने शीतल,शांत,मंद गति से कार्य आरंभ किया।गत रात्रि आये आँधी तूफान के बाद बिजली गुल हो जाने व वोल्टेज फ्लक्चुएशन को ही उन्होंने इसका मुख्य कारण बताया जिससे श्रीमतीजी द्वारा मुझ पर लगाये गए इल्ज़ाम  स्वतः ही न्यूट्रल हो गए।इस कार्य के दौरान ही अन्य ग्राहकों के भी फ़ोन आते रहे जिनको वे यह कहकर आश्वस्त करते रहे कि ये कार्य हो जाने के बाद ही आएँगे।इससे उनकी कर्तव्यनिष्ठा भी साबित हुई।अब हमें भी उन अतिवाचालक को अटेंड करना तो बनता था।
जिस तरह भगवान भाव के भूखे होते हैं उसी तरह तकनीकी विशेषज्ञ भी व्यवहार के भूखे थे।कार्य के दौरान ही कुछ अपनी कहो,कुछ हमारी सुनो वाला रवैय्या था।उन्होंने न सिर्फ अपना बल्कि पूरे परिवार का संक्षिप्त नहीं विस्तारपूर्वक परिचय दिया व हमसे भी विस्तारपूर्वक परिचय लिया।हम पति-पत्नी बारी-बारी से उन्हें अटेंड करते रहे।मेरी डियाबिटीज़ की बीमारी सुनकर बोले कि वो भी डायबिटिक हैं लेकिन कम शक्कर की चाय पी लेते हैं व जहाँ जो भी मिलता है खा लेते हैं।स्पष्ट था कि मैकेनिक देव को जो भी प्रसाद चढ़ाया जाएगा वो उसे सहर्ष स्वीकार कर लेंगे लिहाजा चाय नाश्ते के साथ भोजन भी कराया गया।
स्पार्किंग अग्नि देकर उन्होंने कंप्रेशर देव को जाग्रत करने का भरसक प्रयास किया पर अफसोस देव सो चुके थे,नहीं उठे तो नहीं उठे।अब इस मामले में देव उठनी ग्यारस तक का तो इंतज़ार नहीं हो सकता था लिहाजा अगले दिन नया कंप्रेशर डालने का निर्णय लिया गया।लॉक डाउन के बावजूद कंप्रेशर उपलब्ध करवाने का उन्होंने आश्वासन दिया और अगले दिन सेमसँग के फ्रिज में स्वदेशी गोदरेज का कंप्रेशर फिट करके स्वदेशी पार्ट्स ही इस्तेमाल करने की सलाह दी।कोरोना संक्रमण काल मे घड़े का पानी पीना ही श्रेयस्कर बताया।शाम तक फ्रिज देवता अपनी शीतलता के साथ जाग उठे थे या उनका पुनर्जन्म हो चुका था इसलिए दो ढाई घंटे तक बच्चे फ्रीज़र में कुछ भी रखने की मनाही थी।नीचे वाला पोर्शन तो और छोटा बच्चा था जिसमे अगले दिन ही कुछ रखने की अनुमति थी।
लॉक डाउन के कारण मेरा पेमेंट भी स्टॉकिस्ट के पास अटका हुआ था।पिछले महीने जो किराना क्रेडिट कार्ड से लिया था उसका बिल भर दिया था इसलिए मैं क्रेडिट कार्ड से ही पेमेंट करना चाहता था परंतु लॉक डाउन में ये ज़रा मुश्किल था।कुछ पेमेंट कैश में करना चाहा परंतु निकट के ए.टी.एम.में कैश ही नहीं थे।हमारे व्यवहार का यह असर रहा कि इस संकट की घड़ी में वो सज्जन चेक से पार्ट पेमेंट लेने के लिए राजी हो गए।हमने उन्हें चेक व धन्यवाद देकर विदा किया।
ढाई-तीन घंटे के बाद फ्रीज़र देव की आइस प्लेट्स को लिक्विड डाइट दी गयी।निचले भाग का अगले दिन अन्नप्राशन करवाया गया व नए घड़े को किचन में ससम्मान स्थापित कर दिया गया।प्रधानमंत्रीजी का लोकल बनने के आव्हान का पालन किया गया।लॉक डाउन में पुलिस के डर से कुम्हारों ने घड़ों को चादर से ढक दिया था।घड़ों का घूँघट हटा कर पसंद किया गया।
यकायक बिजली का चले जाना और थोड़ी देर में यकायक आ जाना कुछ ऐसा होता है कि किसी सोते हुए आदमी को झापड़ मार दिया हो।शायद फ्रिज देवता को भी ऐसा ही झापड़ पड़ता हो इसलिए अब बिजली चले जाने पर फ्रिज का मैन स्विच ऑफ किया जाने लगा।नए जन्मे बच्चे का अब भरपूर ख़याल रखा जाता है।
कपिल शास्त्री।
निरुपम रीजेंसी, एस-3/231ए/2ए साकेत नगर,भोपाल (मध्यप्रदेश) पिन कोड:462024
मोबाइल नंबर:9406543770

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