नी कैप
नी कैप
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"कोई हो तो बता देना" "कोई हो तो बता देना"अनेक बार पीछे पड़ने पर मिनी ने आखिर तंग आकर अपनी मम्मी को झिड़क दिया था।
"कोई होगा तो बताऊँगी न!या नहीं हो तो भी बता दूँ।"
"वो मेरी लड़की है,मुझसे कुछ नहीं छुपायेगी।"झिड़के जाने के बावजूद बाद में मनीषा ने बेटी पर विश्वास जताया।
"अच्छा,नहीं छुपायेगी! सुदेश ने भी शंकास्पद लहजे में चश्मे के पीछे से आँखे चौड़ी करके उसे छेड़ा।
"और नहीं तो क्या आजकल तो स्कूल में ही अफेयर्स शुरू हो जाते हैं,मेरी लड़की तो पोस्ट ग्रेड्यूएशन में आ गयी लेकिन सब दोस्त ही हैं,कोई खास नहीं बना।"वो फिर इठलाई।
" तुमने तो ईमानदारी से अपनी मम्मी को दिल की बात बता दी थी न!" सुदेश ने जानते बूझते फिर पुरानी बात छेड़ी।
"हाँ,मेरे मम्मी पापा ने तो बड़े प्यार से सर पर हाथ फैरकर पूछा था "बब्बी बेटी, कोई हो तो बता दे"और गैर जात का पता लगते ही उसमे ढेरों ऐब निकल आये थे।
"अच्छा वो साँवला सा जिसके सिर्फ हँसते समय सफेद दाँत दिखते हैं,वो फटीचर जिसकी लूना की पीछे की सीट ही नहीं है ताकि कोई बैठ नहीं सके,उससे करेगी।"सबके यही कमैंट्स थे।आज वो मल्टीनेशनल कंपनी में वाईस प्रसिडेंट है।
फौरन मेरे हाथ पीले करने की तैयारी शुरू हो गयी थी।फिर वही सवाल आ गया था कि अगर तुमने गैर जात में शादी कर ली तो हमारी छोटी बेटी की शादी कैसे होगी!"
"काम्प्लेक्सग्रस्त माँ-बाप ने बड़े-बड़े घरों के रिश्ते ठुकराकर तुमसे तय कर दी थी।बस इतना ही देखा कि ,दो रोटी खिला लेगा।मैं भगवान से प्रार्थना करती थी कि तुमसे प्यार हो जाए,पंडित जी ने भी बताया था कि मित्रवत पत्रिका है।"बातों ही बातों में मनीषा के पुराने ज़ख्म उभर आये थे।
छुट्टियों में घर आई हुई मिनी आज वापस जा रही थी।ट्राली बैग जमाते समय सर्दी-ज़ुखाम, सरदर्द,बुखार की दवाइयां मनीषा ने खुद रख दी थीं।मिनी ने चुपके से स्पेयर में पड़ा एक नी कैप बेल्ट बैग में रख लिया जिसे मम्मी ने देख लिया और फिर पीछे पड़ गयी "अरे ये क्यों ले जा रही है,ये तो बुड्ढों के लिए होता है।"उसने मम्मी को कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझा पर पापा ने उसके हाव-भाव से नोटिस किया कि बुड्ढा बोलना उसे पसंद नहीं आया था।
बेटी को रवाना करने के बाद सुदेश ने मनीषा को याद दिलाया "याद है पिछली बार जब बेटी के शहर गए थे तो उसका एक स्मार्ट सा, लंबा सा दोस्त मिला था।अपन कॉलिंगगूट की तेज लहरों के बारे में बता रहे थे और उसने पुरी के तट की लहरों के बारे में बताया था कि वह तो इतनी तेज हैं कि उसके घुटने का कटोरा अपनी जगह से खिसक गया था।"
"अरे हाँ,याद आया,मतलब........."मनीषा का जैसे कन्फर्मेशन टेस्ट लग गया हो।
मनीषा ने फौरन पाला बदलते हुए फरमाया "तुम्हारी ही लड़की निकली,अंदर के गांठ की।"
कपिल शास्त्री।
भोपाल।
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