भगवान से नाराजगी
भगवान से नाराजगी
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"मैं जिससे भी प्रेम करता हूँ उसकी सारी धन संपत्ति छीन लेता हूँ।"पिताजी ने लेटे-लेटे ही पढ़ते-पढ़ते जानबूझकर शरारती अंदाज़ में भगवान के उपदेश की यह पंक्तियाँ मम्मी को सुनाईं थी।मम्मी ने नाराजगी से चिढ़कर कहा था "ऐसे पढ़कर सुना रहे हो जैसे ये बड़ा अच्छा करते हैं भगवान।"
सुकेश को अपने दिवंगत माता-पिता के बीच हुए इस संवाद की यकायक याद आयी और एक हल्की सी मुस्कान आ गयी।कहानी के संवादों में बस इतना परिवर्तन हुआ है कि आज सुकेश कुछ नहीं कहता लेकिन पत्नी कहती है कि "मुझे तुमसे नाराज़गी नहीं है,मुझे उस ऊपरवाले से नाराज़गी है।" सुकेश भी पूछता है कि "तुम तो बड़ी धार्मिक औरत हो,गॉड फेयरिंग वीमेन, सही में कह रही हो या मज़ाक में?"
"सही में।" पत्नी जोर दे देकर कहती है।
"फिर तो ठीक है वरना मज़ाक मुझे पसंद नहीं,लेखक हूँ न!"
और सुकेश बस गाने लगता है 'आसमा पे है खुदा और ज़मी पे हम,आजकल वो इस तरफ देखता है कम।' फिर सुकेश को यह भी याद आता है कि लड़कपन में यही गीत गाने पर वृद्ध चाची अम्मा ने कहा था "नहीं ऐसा नहीं बोलते।"यानी वह भी मानती थीं कि भगवान और खुदा एक ही हैं।
टेलीविज़न के खबरी चैनल पर पर दिन-रात रिया-रिया-रिया चल रिया है और यह खबर कि बॉलीवुड ड्रग माफिया की गिरफ्त में है।
कपिल शास्त्री।
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