क्वालिटी टाइम (व्यंग्य)
क्वालिटी टाइम
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ये बाजारवादी संस्कृति की हवा के साथ साथ घटा के संग संग एक अंग्रेजी शब्द 'एन्जॉय'करना'लोगों की मानसिकता पर छा गया था।धनाढ्य,नव धनाढ्यों के आलीशान गलियारों से होता हुआ मध्यमवर्ग के घरों में भी बिन बुलाए मेहमान की तरह घुस गया था।हिंदी में इसका तर्जुमा करें या भारतीय परिपेख्य में इसे समझने की कोशिश की गई तो ये समझ में आया कि ये तो जीवन का आनंद लेना है।अब लेना शब्द आ गया तो मतलब साफ है कि भाई जेब ढीली होने वाली है।कुछ नियत समय के लिए ही हमे आनंदित होना है और उसके लिए तय रकम चुकानी है।
आनंद की जो अविरल धारा हमारे तन मन मे बहती थी वो शायद कहीं सूख चुकी थी इसलिए अब हमें कुछ बाल्टी आनंद प्राप्त करने के लिए एक टैंकर मंगवाना पड़ेगा।हमे एन्जॉय करना पड़ेगा।चलो जैसे तैसे इसे समझ लिया गया तो अब इसका एक और परिष्कृत रूप आ गया कि "क्वालिटी टाइम एन्जॉय"करो।ये शायद विवाहितों के लिए था और खासकर अधेड़ जोड़ों में इसका सीधा असर पत्नियों पर हुआ।पतियों को आत्मग्लानि से भर देने के लिए इसका प्रयोग अस्त्र शस्त्र की तरह किया जाता है।चलो इसे भी हिंदी में समझते हैं यानी "गुणवत्ता वाला समय"या "उच्च गुणवत्ता वाला समय।"
जहाँ तक किसी उत्पाद की गुणवत्ता का प्रश्न है तो ये समझ में आता है कि उसे राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय बाजार में उतारने के लिए उच्च गुणवत्ता वाला होना लाज़मी है।इसी तरह श्रीमतीजी और बच्चे खुश रहें इसके लिए पति व पापा की गुणवत्ता भी परखी जानी चाहिए,ऐसा कुछ समझ मे आता है।अर्थात नौकरियों में और काम धंधे,व्यापार में बढ़ोतरी के बाद अब आपकी जिम्मेदारी स्पाइडरमैन के एक संवाद कि "विथ ग्रेट पावर कम्स ग्रेट रेस्पॉसिबिलिटी"की तरह दोनो तरफ बढ़ गयी है।अगर आप गुणवत्ता वाला समय अपने परिवार को देना चाहते हो तो पहले आपको अपने अंदर कुछ गुणों का विकास करना पड़ेगा जिससे श्रीमतीजी संतुष्ट हो सके और कहें कि "हाँ, पतिदेव ये था गुणवत्ता वाला समय,आपका सानिध्य ही कितना गुणकारी है।"ऐसा कुछ सुनने के लिए मन लालायित था परंतु हुआ इसके ठीक उल्टा।
किसी उत्पाद की गुणवत्ता मापने के लिए तो अनेक यंत्र हैं किंतु पति की गुणवत्ता नापने का बैरोमीटर तो श्रीमतीजी के ही पास है,लिहाजा इस शब्द के आते ही समस्त अधिकार ही उनके पास आ गए।क्वालिटी टाइम को आपने परिभाषित तो कर लिया परंतु इसके कार्यपालन में इसे साबित करने में आपके पसीने छूट जायेगें।ये तो वही बात हो गयी कि 'देवकी का आठवां पुत्र कौन?'किसे क्वालिटी टाइम कहोगे?'
इस दिशा में अगर आपने पूर्व में किये गए प्रयास गिनाने शुरू किए तो अधिकांश खारिज़ हो जायेगें।"देखो प्रिये,मैं तुम्हें उस रोज घुमाने ले गया था न।"
"वो हाट से सब्जी भाजी लाने को तुम क्वालिटी टाइम कहते हो,लानत है।"लो एक दावा तो अभी खारिज़ हो गया।फिर आप दूसरा दावा पेश करोगे कि "हे प्रिये,उस रोज मैंने तुम्हें बड़ा तालाब,न्यू मार्केट भी घुमा दिया और पानी पुड़ी भी खिला दी तो वो भी तो अपना क्वालिटी टाइम था न।"
"तो वो तो तुम अपने किसी काम से मुझे अपने साथ ले गए थे ये कोई विशुद्ध क्वालिटी टाइम नहीं हुआ,क्वालिटी टाइम मतलब जो समय तुमने पूरी तरह मेरे लिए निकाला हो,जो पूरा दिन सिर्फ मुझे ही दिया हो,मुझे खुश कर दिया हो,वो होता है क्वालिटी टाइम।"
"अच्छा,तो ये तो इस शब्द से परिचित होने से पहले भी होता था कि पूरा एक दिन मैं तुम्हारे लिए ही निकाल देता था और बच्ची से कहता था कि "आज मम्मी का दिन है।"वो चिढ़ जाती थी और फिर उसने भी अपना स्वयंघोषित दिन निकालना शुरू कर दिया था।" "पापा आज मेरा दिन है।"
"तो कौन सा बड़ा तीर मार लिया,सब करते हैं और कोई शिकायत नहीं करते।"बड़े बड़े लोग तो सप्ताहांत मनाते हैं,शहर से बाहर जाते हैं और तुम यहीं घुमा कर बड़ी डींग मार रहे हो।"
ओह, ये दावा भी खारिज कर दिया गया।
"हे प्रिये याद करो उस दिन चौक में तुम दस,बारह दुकानों में जाकर कपड़ो के मोलभाव कर रहीं थी और मैं बाहर शांतिपूर्वक तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था।तुम्हारे क्वालिटी टाइम के लिए मैंने कितना धीरज से काम लिया।"
"बाहर खड़े होकर अंदर घूर घूर कर देख रहे थे और मुझ पर एक मानसिक दवाब बना रहे थे,मैं तो अच्छे से परचेजिंग ही नहीं कर पाई।"अब इसमें भी मीन मेख निकल आयी।
"याद करो,प्रिये मैं तुम्हे मॉल में फ़िल्म दिखाने भी ले गया था और डेढ़ सौ रुपये के पॉपकॉर्न और कोका कोला भी पिलाया था,उस वख्त मैं पूरी तरह तुम्हारे साथ था।"
"ऐं, उस बात को तो बहुत वख्त बीत चुका है,कब तक गड़े मुर्दे उखाड़ते रहोगे।उस समय हॉल में मेरे साथ बैठे रहना तो तुम्हारी मज़बूरी थी।"
"हे प्रिये,शहर के कोई भी दर्शनीय स्थल अब देखने से नहीं बचे,कोई रेस्टॉरेंट नहीं बचा फिर भी तुम ये मानने को तैयार नहीं हो कि हमने भी क्वालिटी टाइम बिताया है।"
अब इसके जवाब में आपका अन्य पतियों से तुलनात्मक अध्ययन शुरू हो जाएगा कि "उनको देखो,उसको देखो,इसे कहते हैं क्वालिटी टाइम,तुम तो हर वख्त अपने मोबाइल में लगे रहते हो और क्वालिटी टाइम का सत्यानाश कर देते हो।"
इस मामले में पड़ोस के अपार्टमेंट में रहने वाला योगेश मेरा ही नहीं समस्त अपार्टमेंटवासी पतिओं का परमशत्रु है।गैलरी में आकर चिल्लाता है-"यूहू,डार्लिंग योर टी एंड ब्रेकफास्ट इज़ रेडी।"समस्त पत्नियाँ जलभुन जाती हैं व अन्य पतिओं पर दवाब बढ़ जाता है।कमीना अनवरत क्वालिटी टाइम मुहैय्या कराता रहता है।अन्य पत्नियाँ अवसादग्रस्त हो जाती हैं कि ऐसा राजकुमार उन्हें क्यों नहीं मिला।अगर सोसाइटी में यह मुद्दा उठाया गया तो समस्त पत्नियाँ उसी के पक्ष में खड़ी नज़र आयेंगी।अगर वह इतना हट्टा-,कट्टा न होता तो सब मिलकर उसे पीट-पाट डालते।पत्नियों की अदालत में लेखन तो किसी प्रतिभा के दायरे में ही नहीं आता बल्कि इसे क्वालिटी टाइम सत्यनाशक माना जाता है।
ये क्वालिटी टाइम भी कितना क्षणभंगुर है,पल दो पल ही साथ रहता है फिर नए पल की तलाश शुरू हो जाती है।"हे क्वालिटी टाइम तुम एक ऐसे पात्र हो जिसमें असंख्य छिद्र हैं जिसमे से आनंद के पल फौरन ही रिस जाते हैं।तुम बहुत जल्दी भुला दिए जाने वाले हो।तुम ज़रा भी स्थायी नहीं हो।तुम लुढकते पत्थर हो,तुम्हारा कोई ठौर ठिकाना नहीं है।मैं तुम्हे कहाँ ढूंढू?तुम्हारे अस्तित्व में आने के बाद मेरे सारे गुण अवगुण में बदल गए हैं।तुम्हे खोजने के प्रयास में लोग वास्तविक आनंद भी भूल गए हैं।तुम्हारे कई चित्र फेसबुक पर दिखाकर लोग दावा कर रहे हैं कि उन्होंने क्वालिटी टाइम गुजारकर बड़े सुख प्राप्त कर लिए हैं।तुम्हे लेकर पति पत्नी में कोई सामंजस्य नही है।पत्नियाँ तुम्हे किटी पार्टीज में ढूँढ़ रही हैं और पति कहीं और।अब मुझे तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है।अब मैं तुम्हारे बिना भी अपने परिवार को खुश रख सकता हूँ।
"हे प्रिये,तुम वो वख्त याद करो जब हमे क्वालिटी टाइम बिताने की कोई ज़रूरत ही नहीं थी।मैं गाता था "एक तेरा साथ हमको दो जहाँ से प्यारा है"और तुम गाती थी "तेरा मेरा साथ रहे।"
कपिल शास्त्री।भोपाल।
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